द स्लीप सोलुशन — आपकी नींद की गुणवत्ता को कैसे बढ़ाएं और आपकी जिंदगी में नींद का क्या प्रभाव पड़ता है|

मेरी जिंदगी में सबसे बड़ा शिक्षक जो चीज आती ना हो उसे आचरण में डालना रहा है | आपको तैरना नहीं आता , कशिश करते रहिए और आ ही जायेगा — अभी तक मुझे तैरना नहीं आया , कोशिश जारी है | मैं सबसे ज्यादा कहीं से सीखा हूँ तो वो है पढ़ना, लोगों से मिलना जिनसे आप का कोई नाता हो या न हो कुछ अंतर नहीं पड़ता | खुले ह्रदय से मिलिए , अपना ह्रदय खोलिए सामने वाले को सुनिए | अगर किसी ने आपके सामने अपना अतीत // वर्त्तमान खोला तो उसकी जिन्दगी से सीख अपने आप मिल जाएगी बिना उसके दुखों के | अहसास होगा उसके दुखों का पर दर्द नहीं. | बीते कुछ सालों से किताबें पढ़ना जैसे छूट सा गया था | बीते कुछ महीनो से ३-४ पुस्तकेँ प्रति माह पढ़ने की कोशिश करता हूँ|

ज्ञान अर्जित कर रहा हूँ और चाहता हूँ की मेरा परिवार भी मेरे साथ पढ़े | पढ़ेगा तभी तो बढ़ेगा इंडिया | सबसे बड़ी अड़चन है उसमे भाषा …. मैं सारी किताबें अंग्रेजी भाषा में पढ़ता हूँ और उसका निचोड़ भी अंग्रेजी में ही लिखता हूँ| अब आगे से कोशिश करूँगा की कम से कम एक पुस्तक का सारांश हिंदी में लिखूँ जिससे मेरा परिवार उसे पढ़ पाए और संभवतः अपने जीवन में समावित भी कर पाए |

दिनांक ५ अप्रैल २०२० // द स्लीप सोलुशन — आपकी नींद की गुणवत्ता को कैसे बढ़ाएं और आपकी जिंदगी में नींद का क्या प्रभाव पड़ता है

ग्लिम्फैटिक सिस्टम शरीर का एक तंत्र है जिसकी खोज 2013 में हुई है सोचिए वैज्ञानिक और जीव विज्ञान इतने दिनों से है और किसीको पता ही नहीं था | इस तंत्र का काम दिमाग से कचरा साफ करना है …. अगर आप अच्छे से सोते हैं रात में | अभी तक ऐसा लगता था जैसे सोना केवल तन मन के थकान को दूर करता था |

नींद ३ चरणों में आती है :

- हल्की नींद — इसमें भी दो चरण होते हैं १] पहले चरण में मांसपेशियाँ शिथिल हो जाती हैं २] दूसरे चरण में आपका पूरा शरीर विश्राम करने लगता है

- गहरी नींद — इस चरण में आप जब सोते हैं तो आपका शरीर विकास की प्रक्रिया से गुजरने लगता है .. आपकी लम्बाई , मानसिक विकास , बाल , नाख़ून सब यहीं बढ़ते हैं | छोटे बच्चे गहरी नींद में अगर न सो पाएं तो उनका विकास अवरोधित होने लगता है

- सपनों वाली नींद — हर इंसान को सपने नहीं आते . जब आपको सपने आते हैं उस समय आँखों की पुतलियाँ वैसे ही चलती हैं जैसे आपके जागे हुए में | सपना इस बात का प्रमाण है की आपका दिमाग अभी भी जागृत है |

हिस्टामाइन :

हिस्टामाइन हमारे शरीर में सोने और जगने को नियंत्रित करता है और दिमाग //स्पाइनल कॉर्ड // गर्भाशय के बीच में सामंजस्य बिठाने में भी इसकी अहम् भूमिका है | जब भी आपके शरीर में कहीं खुजली होती है या जलन होती है तो ये प्रतिक्रिया देने में मदद करता है |

सिरकाडियन साईकल या शारीरिक घड़ी :

हर इंसान की बॉडी क्लॉक थोड़ी अलग अलग होती है, जो 22 घंटे से 25 घंटे के बीच होती है। अर्थात यह जरूरी नहीं कि धरती पर 24 घंटे का दिन होने का मतलब यह नहीं कि शरीर भी इसे 24 घंटे का ही माने। औसतन बॉडी क्लॉक 24.5 घंटे की होती है। जो लोग सुबह जल्दी उठते हैं, उनकी बॉडी क्लॉक 22 घंटे की होती है और जो देर से उठते हैं, उनकी बॉडी क्लॉक 25 घंटे की होती है। मतलब जो सुबह 5 बजे के आसपास उठते हैं उनकी बॉडी क्लॉक 24 घंटे के बजाय 22 घंटे में ही पूरी हो जाती है। सूरज की रोशनी हमारी बॉडी क्लॉक को दुनिया के 24 घंटे के चक्र के साथ सामंजस्य बैठाने में मदद करती है। इसका मतलब है कि सुबह के समय जब कोई सूरज की रोशनी के जितना संपर्क में रहता है, बॉडी क्लॉक उतनी ही तेज होती है। वहीं शाम के समय सूरज की रोशनी के संपर्क में रहने पर भी बॉडी क्लॉक धीमी चलती है। मनुष्य का शारीरिक रिद्म अलग-अलग समय में अलग-अलग तरह से व्यवहार करता है। जो लोग उसके अनुसार अपनी दिनचर्या निर्धारित करते हैं, वे अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा स्वस्‍थ रहते हैं।

आइए जानते हैं कि मनुष्य के शरीर में शारीरिक रिद्म के अनुसार प्रमुख स्थितियां क्या हैं:

- रात 2 बजे: इस समय शरीर सबसे गहरी नींद में होता है।
- सुबह 4.30 से 5 बजे: इस समय शरीर का तापमान सबसे कम होता है।
- सुबह 6 बजे: इस वक्त शरीर तनाव बढ़ाने वाले कार्टिसोल हार्मोन का सबसे ज्यादा स्राव करता है। इसका कारण है कि इस समय शरीर जागने के लिए तैयार हो रहा होता है।
- सुबह 7 बजे: शरीर में ब्लड प्रेशर तेजी से बदलता है। यही कारण है कि स्ट्रोक या हार्ट अटैक जैसे हादसे सुबह ज्यादा होते हैं।
- सुबह 8.30 बजे: इस समय शरीर का बाउअल मूवमेंट सबसे तेज होता है।
- सुबह 9 बजे: शरीर में टेस्टोस्टीरॉन ज्यादा बनने लगता है और शरीर किसी भी तरह की एथलेटिक गतिविधि के लिए सबसे ज्यादा तैयार होता है।

नोट: जब आप ब्लू प्रकाश वाला फ़ोन // टीवी या कोई कृत्रिम प्रकाश वाला यन्त्र देखते हैं रात में ०९०० बजे के बाद तो बॉडी क्लॉक मेलाटोनिन का उत्सृजन रोक देता है ताकी आप सो न जाएँ . इससे आपका बॉडी क्लॉक बिगड़ सकता है और जब बिगड़ेगा तो पेट ख़राब रह सकता है , आपकी ताकत कम हो सकती है , ऊर्जा कम होगी , ह्रदय रोग हो सकता है और आप अपने उम्र से बड़े लगेंगे . रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होगी और आप कम ऑक्सीजन शरीर के अंदर लेंगे |

कैसे सोएं ?

- सोने का प्रयोजन नियोजन करें — प्रकाश , बिस्तर , फ़ोन , हवा , मच्छर , खाना , प्रार्थना , धन्यवाद् , क्षमा
- साफ बिस्तर लगाएं
- अगर दिमाग में कोई बात चल रही हो तो उसे एक कागज में लिखलें और बोलें की उसे कल सोचेंगे
- अगर आपको अच्छी नींद चाहिए तो अपने दिमाग के अंदर चल रही चीज़ों को शांत करना जरुरी है
- अगर आपकी शारीरिक घड़ी की मरम्मत करनी है तो ध्यान दें — आप कब खाते हैं, आपकी प्रकाश या अंधकार को लेकर प्रतिक्रिया , आप कसरत कब करते हैं , आप आराम कब करते हैं , आप पानी कब और कितना पीते हैं और कब सोते हैं
- खर्राटे तभी आते हैं जब आप अपने पीठ के बल सोते हैं , हमेशा साइड से सोएं
- याद रखें आपका मस्तिष्क शरीर की २० प्रतिशत ऑक्सीजन का उपयोग अकेला करता है
- दिन में सोना या बैठे बैठे सोना या झपकी लेना, रात के सोने को बदल नहीं सकता| रात के सोने की महत्ता आपके शरीर के लिए बहुत बड़ी है